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(सप्तऋषि अखाड़े का पट्टाभिषेक कार्यक्रम सम्पन्न होने जा रहा है जिसमें मंडलेश्वर महामंडलेश्वर महंत आदि नियुक्त किये जाएंगे जुड़ने के लिए शीघ्र सदस्यता ग्रहण करें )

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सप्तऋषि अखाड़ा के बारे में

हमारे उद्देश्य

भारत के प्राचीन ऋषियों की परंपरा सप्तऋषि अखाड़ा परिषद ,,भारत के सभी विरक्त, सद्गृहस्थ संत जो पूर्ण समर्पण के साथ सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं ऐसे सभी सन्तों को एक साथ जोड़कर ।समाज मे फैली कुरीतियों को मिटाने का कार्य एवं समाज को नशा मुक्त करने भारत को श्रेष्ठ भारत बनाने बाले हमारे पूर्वज ऋषियों की परम्परा को बचाने के लिए अखाड़ा परिवार कार्य कर रहा है । वर्तमान में कुछ संत भेष में बैठे जिहादी ,पाखंडी,ढोंगी,आडम्बरी जो सनातनियों को पथ भ्रष्ट कर अपनी जेब भरने में लगे है या भगवान के बराबर अपनी जयजयकार कराने का कार्य कर रहे हैं अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए हमारे धर्म ग्रंथों से छेड़छाड़ कर समाज को गुमराह कर रहे हैं सनातन संस्कृति का वास्तविक स्वरूप बिगाड़ कर अपना काम कर रहे हैं ऐसे पाखंडियो के खिलाफ सप्तऋषि अखाड़ा परिवार निरन्तर कार्य कर रहा है । हमारे भारत की प्राचीन ऋषि परम्परा को पुनः स्थापित करने का हम सब मिलकर एक प्रयास करें और अखाड़े को मजबूत बना कर धर्म और संस्कृति की रक्षा करें

आगामी योजना 

सप्तऋषि अखाड़ा परिषद के द्वारा सप्तऋषियों के नाम से सात पीठों की स्थापना का कार्य किया जायेगा। एवं भारत के अन्य हजारों महान ऋषियों जिन्होंने अपने त्याग और तपस्या से योग,ज्ञान,और विज्ञान आयुर्वेद जैसी चीजें हम सब को दी है और आज ये समाज उन ऋषियों के नाम भी नही जानता सप्तऋषि अखाड़ा परिवार उन सभी ऋषियों के नाम से अलग अलग पीठों की स्थापना कर उनके नामों को जाग्रत करेगा ।

 

अखाड़े के 7  7  ऋषियों की टोली (जमात) के रूप में धर्म प्रचार तथा भारत के अलग अलग जिलों तहसीलों में जन जागृति नशा मुक्ति संकल्प जैसे कार्य अखाड़े के ऋषियों द्वारा किये जायेंगे

President Message

सप्तऋषि अखाड़ा भारत की ऋषि परंपरा से जुड़ा एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगठन है। यह अखाड़ा उन महान सप्तऋषियों की परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिनके ज्ञान, तपस्या और धर्माचरण से भारतीय संस्कृति का निर्माण हुआ।

सप्तऋषि कौन हैं?

परंपरा में सप्तऋषियों के नाम प्रमुख रूप से ये बताए जाते हैं –
    1.    अत्रि
    2.    भरद्वाज
    3.    गौतम
    4.    जमदग्नि
    5.    कश्यप
    6.    वशिष्ठ
    7.    विश्वामित्र

इन्हें ब्रह्मा जी के मानस पुत्र माना गया है और यह सृष्टि, धर्म, विज्ञान, योग, ध्यान और तपस्या की महान परंपरा के आधारस्तंभ हैं।

सप्तऋषि अखाड़ा परिषद् का उद्देश्य
    •    भारत की ऋषि-परंपरा और वैदिक संस्कृति का संरक्षण एवं प्रसार करना।
    •    समाज को संस्कार, योग, धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर प्रेरित करना।
    •    युवा पीढ़ी में भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और अध्यात्म के प्रति जागरूकता फैलाना।
    •    साधु-संतों, महात्माओं और ऋषि-परंपरा से जुड़े विद्वानों का संगठन करना।

विशेषताएं 
    •    अखाड़ा में तप, योग और सेवा का महत्व है।
    •    वैदिक मंत्रों, यज्ञ, साधना और प्रवचन के माध्यम से समाज को मार्गदर्शन दिया जाता है।
    •    इसका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि राष्ट्र एवं समाज कल्याण भी है।

? सरल शब्दों में कहें तो सप्तऋषि अखाड़ा भारतीय ऋषियों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने वाला संगठन है, जो समाज को धर्म, योग और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करता है।

Our Objectives

संत सुरक्षा

सप्तऋषि

नशामुक्ति अभियान

अखाड़े के प्रमुख उद्देश्य

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